उज्जैन: आज के दौर में लोगों का खान पान बदल गया है। इसी के साथ बदलते वक्त में हर वर्ग के लोगों के सोच विचार में भी काफी परिवर्तन आ चुका है। यह सब लोगों के पहरावे में भी दिखाई देता है और यह व्यक्तिगत की आजादी के नाम पर हो रहा है। इससे धार्मिक स्थल भी प्रभावित हो रहे है। जाने अजाने लोग धार्मिक स्थलों की मर्यादा को ठेस पंहुचा रहे है, जो किसी भी तरह से सही नहीं है। इस सबके चलते देश में कई धार्मिक स्थलों में आने वाले श्रद्धालुओं के लिये ड्रेस कोड के नियम लागू किये गए है। इसके पीछे यही मकसद है कि धार्मिक स्थल की मर्यादा बनी रहे और आने से पहले श्रद्धालुओं को इसका ध्यान रहे।
विश्व प्रसिद्ध 12 ज्योतिर्लिंगों में से श्री महाकालेश्वर मंदिर में लगातार दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। श्रावण के महीने में श्रद्धालुओं की संख्या आम दिनों से काफी ज्यादा बढ़ जाती है। बाबा महाकाल के दर्शनों के लिए देश और विदेशों से भी श्रद्धालु धार्मिक नगरी उज्जैन पहुंचते हैं। श्री महाकालेश्वर मंदिर में भी आने वाले कुछ श्रद्धालु छोटे व गैर संस्कृतिक कपड़े पहनकर पहुंच रहे हैं। हलांकि इस सबका समय समय पर विरोध होता आया है। इस मामले में श्री महाकालेश्वर प्रबंध समिति कई बार कार्रवाई भी करती है। देश के अन्य धार्मिक स्थलों की तरह श्री महाकालेश्वर मंदिर में भी श्रद्धालुओं के लिए ड्रेस कोड निर्धारित करने की मांग उठने लगी है। मंदिर में आने वाले ज्यादातर श्रद्धालुओं का भी मानना है कि बाबा महाकाल के दर्शन करने के लिये आने वाले सभी श्रद्धालुओं को मर्यादा का ध्यान रखना चाहिये। कुछ श्रद्धालु जब छोटे और अजीब से कपड़े पहनकर श्री महाकालेश्वर मंदिर में पहुंचते हैं, ये सही नहीं लगता। इससे भारतीय संस्कृति का भी परिहास होता है। महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पुरोहित पंडित भूषण व्यास का भी मानना कि महाकालेश्वर मंदिर में ड्रेस कोड लागू होना चाहिए। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को भारतीय संस्कृति की परिचायक कपड़े पहनकर ही बाबा महाकाल के दर्शन करने के लिये आना चाहिए। इस सब पर सभी को ध्यान देना चाहिए।