कोलकाता: बंगाल चुनावों के बाद से तृणमूल कांग्रेस में बढ़ती अंदरूनी कलह अब अदालत तक पहुंच गई है। तृणमूल कांग्रेस पार्टी के प्रतीक और तिजोरी पर नियंत्रण को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में अलिपुर अदालत के एक अंतरिम आदेश ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। अदालत ने ममता बनर्जी और उनके गुट वाले नेताओं को फिलहाल पार्टी पदाधिकारी के रूप में काम करने और बैंक खातों के संचालन से रोक दिया है। अदालत का आदेश ऋतब्रत गुट की ओर से दायर याचिका पर आया, जिसमें आशंका जताई गई थी कि पार्टी के फंड और दस्तावेजों में गड़बड़ी हो सकती है।
तृणमूल नेता व पूर्व मंत्री अरूप विश्वास के भाई स्वरूप विश्वास की पत्नी व तृणमूल नेता तथा पार्षद जुई विश्वास द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अलीपुर सीनियर डिवीजन कोर्ट ने ममता बनर्जी और उनके करीबियों को तगड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने अपने एकतरफा अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया कि ममता बनर्जी समेत कालीघाट खेमे के नेता खुद को तृणमूल का पदाधिकारी नहीं बता सकेंगे, न ही वे पार्टी के बैंक खातों और संपत्ति से जुड़ा कोई लेन-देन कर पाएंगे। कोर्ट का मानना है कि सुनवाई पूरी होने तक पार्टी की संपत्ति और दस्तावेजों को सुरक्षित रखना जरूरी है।
हालांकि ममता समर्थक वकीलों का आरोप है कि यह फैसला एकतरफा है और उनका पक्ष सुने बिना दिया गया। इस फैसले से बिफरे ममता के वकील वैश्वानर चटर्जी और उनके सहयोगियों ने कोर्ट में जमकर हंगामा किया।