लुधियाना: पंजाब पुलिस अब हर जिलों के मालखानों को डिजिटल करने जा रही है। हर पुलिस जिले में बनाए जाने वाले सेंट्रलाइज्ड मालखानों में केस प्रापर्टी के रखरखाव और उसकी आवाजाही का पूरा रिकार्ड अब डिजिटल किया जाएगा। इसके लिए मालखाना मैनेजमेंट एंड डिस्पोजल ट्रैकिंग सिस्टम (एमएमडीटीएस) तैयार किया गया है। इसमें केस प्रापर्टी को बार कोड या क्यूआर कोड से जोड़ा जाएगा। इससे किसी भी केस की प्रापर्टी को एक क्लिक पर ट्रैक किया जा सकेगा। जिला और राज्य स्तर के अधिकारी भी इसकी आनलाइन निगरानी कर सकेंगे। किस समय केस प्रापर्टी मालखाने में जमा हुई? किस अधिकारी ने उसे जमा करवाया? और बाद में उसे कब व किस उद्देश्य से निकाला गया? इसका पूरा रिकार्ड सिस्टम में उपलब्ध रहेगा। सेंट्रलाइज्ड मालखानों में केस प्रापर्टी को डबल-वाल्ट सील सिस्टम के तहत सुरक्षित रखा जाएगा और परिसर में सीसीटीवी निगरानी भी रहेगी।
पुलिस कमिश्नर स्वप्न शर्मा के नेतृत्व में लुधियाना पुलिस में भी इस व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू करने की तैयारी की जा रही है। नई व्यवस्था के तहत थानों में केस प्रापर्टी को लंबे समय तक रखने की बजाय उसे निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद सेंट्रलाइज्ड मालखाने में जमा करवाना होगा। केस प्रापर्टी जमा करवाने के बाद उसकी डिजिटल एंट्री की जाएगी और प्रत्येक सामान को अलग पहचान दी जाएगी।
विशेष रूप से नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में यह व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे केस प्रापर्टी के साथ छेड़छाड़ किसी प्रकार की कमी की स्थिति में जिम्मेदारी तय करने में आसानी होगी। नई व्यवस्था के तहत पुलिस थानों को केस प्रापर्टी 48 घंटे के भीतर सेंट्रलाइज्ड मालखाने में जमा करवानी होगी। इस अवधि में थाने में इन्वेंटरी तैयार करने और अन्य कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। यदि किसी कारण से 48 घंटे के भीतर केस प्रापर्टी जमा नहीं हो पाती है तो संबंधित अधिकारी को देरी का लिखित कारण दर्ज करना होगा। बारकोडिंग और क्यूआर कोड के माध्यम से प्रत्येक केस प्रापर्टी की पहचान होगी और उसकी आवाजाही का रियल टाइम रिकार्ड उपलब्ध रहेगा। अधिकारियों को एक क्लिक पर मालखाने की स्थिति और किसी भी केस की प्रापर्टी की जानकारी मिल सकेगी।